घटना कार्रवाई प्रणाली

भारत कार्रवाई आपदा के कारगर, कुशल तथा समग्र प्रबंधन के लिए आपदा प्रबंधन (डीएम) अधिनियम, 2005 की धारा 6 के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा घटना कार्रवाई प्रणाली (आईआरएस) पर दिशानिर्देष जारी किए गए हैं। एनडीएमए की दूरदृश्टि (विजन) देश में आपदा कार्रवाई प्रक्रम को मजबूत बनाना तथा मानकीकृत करके जान-माल की हानि को कम-से-कम करना है।

यद्यपि भारत भूतकाल में आपदाओं से सफलतापूर्वक निपटता रहा है, फिर भी अभी इस मे अनेक खामियां है जिन्हें दूर करने की जरूरत है। आज की तारीख में कार्रवाई को एक अच्छी तरह तैयार किए गए कार्रवाई प्रक्रम के अनुसार और अधिक व्यापक कारगर, तेज तथा सुनियोजित किया जाना है। हमारी कार्रवाई प्रणाली ने कुछ खामियों को महसूस करके और महत्वपूर्ण खामियों को दूर करने की इच्छा ने भारत सरकार को विश्व की बेहतरीन प्रथाओं (प्रैक्टिस) की ओर द्रष्टि डालने को बाध्य किया। भारत सरकार को पता चला कि कैलिफोर्निया में अग्निशमन के लिए विकसित की गई प्रणाली बहुत विचक्षण (काम्प्रिहेंसिव) है तथा इसलिए सरकार ने घटना कार्रवाई प्रणाली को अपनाने का फैसला किया।

डीएम अधिनियम, 2005 के उपबन्धों के परिप्रेक्ष्य में, एनडीएमए ने महसूस किया कि भारतीय प्रशासनिक सेटअप के अनुकूल आवश्यक संषोधनों के साथ इस विषय पर प्रामाणिक दिशानिर्देष अनिवार्य थे। इस जरूरत को पूरा करने के लिए, विशेषज्ञों का एक प्रमुख समूह गठित किया गया और चार प्रादेशिक परामर्श कार्यशालाओं का संचालन किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि राज्य सरकारों तथा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि इनमें भाग ले तथा उनके विचारों पर उचित ध्यान दिया जाए। एलबीएसएनएए, एनआईडीएम तथा अन्य आरटीआई/एटीआई जैसे प्रशासनिक संस्थानों के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रमुख प्रशिक्षकों ने भी इनमें भाग लिया। अन्य देशों द्वारा आईसीएस के रूपांतरण (अडैप्षन) की भी जाँच की गई। तैयार किए गए मसौदे को दोबारा सभी राज्यों, संघराज्य क्षेत्रों के पास भेजा गया और उनकी अंतिम टिप्पणियों को प्राप्त तथा समावेशित किया गया। इस प्रकार दिशानिर्देषों के एक सम्पूर्ण सेट को तैयार किया गया और इसे घटना कार्रवाई प्रणाली (आईआरएस) कहा जाता है।

परिभाषा  और  संदर्भ

घटना कार्रवाई प्रणाली (आईआरएस) कार्रवाई (रिस्पांस) मे तदर्थ उपायों की गुंजाइश को कम करने के लिए एक प्रभावी प्रक्रम है। इसमें वे सभी काम शामिल किए गए हैं जिन्हें उनकी जटिलता के स्तर पर ध्यान दिए बिना आपदा प्रबंधन के दौरान अंजाम दिया जा सके। इस प्रणाली में सभी संभव कार्रवाई जरूरतों पर ध्यान देने के लिए विभिन्न अनुभागों के साथ एक संयुक्त दल तैयार करने पर विचार किया गया है। आईआरएस विभिन्न कार्यों को करने के लिए अधिकारियों की पहचान तथा उन्हें नामोदिष्ट करता है और उन्हें उनकी विभिन्न भूमिकाओं में प्रशिक्षित करवाता है। यदि आईआरएस उपलब्ध कराई गई है तथा हितधारक को प्रशिक्षित एवं अपनी भूमिकाओं के प्रति जागरूक कराया गया है, तो इससे कार्रवाई चरण के दौरान अव्यवस्था तथा भ्रम को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। हर किसी को पता होगा कि क्या किए जाने की जरूरत है, कौन इसे करेगा और कमान किसके पास है, आदि। आईआरएस एक लचीली प्रणाली है और सभी अनुभागों, षाखाओं तथा इकाइयों को उसी समय सक्रिय किए जाने की जरूरत नहीं होती है। विभिन्न अनुभागों, शाखाओं तब इकाइयों को तब ही सक्रिय किया जाए जबकि उनकी जरूरत हो।

इन दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य राज्य तथा जिला स्तरों पर विभिन्न कार्यकर्ताओं तथा हितधारकों की भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों को निर्धारित करना है और राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला स्तर पर बहुस्तरीय सांस्थानिक प्रक्रमों पर समन्वय कैसे किया जाएगा, यह तय करना है। इसमें बेहतर योजना बनाने, जवाबदेही तथा आकलन के लिए विभिन्न कार्यकलापों के उचित प्रलेखीकरण की जरूरत पर जोर दिया गया है। इससे नए कार्रवाईकर्ताओं को स्थिति का एक सम्पूर्ण चित्र तुरंत प्राप्त करने तथा तुरंत कार्रवाई के लिए कदम उठाने के लिए भी मदद मिलेगी।

आईआरएस  संगठन

आईआरएस संगठन क्षेत्र में घटना कार्रवाई दल (आईआरटी) के माध्यम से काम करता है। हमारी प्रषासनिक संरचना तथा डीएम अधिनियम 2005 के अनुसार, उत्तरदायी अधिकारियों (आरओ) को घटना कार्रवाई प्रबंधन के सम्पूर्ण प्रभारी के रूप में राज्य तथा जिला स्तर पर नामोदिष्ट किया गया है। तथापि आरओ घटना कमांडर (आईसी) को अपनी जिम्मेदारियां सौंप सकता है जो तब घटना का प्रबंधन आईआरटी के माध्यम से करेगा। आईआरटी सभी स्तरों; राज्य, जिला, उप-प्रभाग, तहसील/ब्लाॅक, पर पूर्व-नामोदिष्ट होंगे। पूर्व चेतावनी की प्राप्ति पर, आरओ उन्हें सक्रिय करेगा। यदि किसी चेतावनी के बिना कोई आपदा घटित होती है तो स्थानीय घटना कार्रवाई दल कार्रवाई करेगा और यदि जरूरी हो अतिरिक्त सहायता के लिए आरओ से संपर्क करेगा। कार्रवाई हेतु हवाई सहायता को सक्रिय करने के लिए जिला, राज्य तथा राश्ट्र स्तर के बीच उचित समन्वय हेतु एक नोडल अधिकारी (एनओ) नामोद्दिश्ट किया जाना होता है।

 

उŸारदायी अधिकारी

नोडल अधिकारी (वायु प्रचालन)               घटना कमांडरउप अधिकारी

सूचना एवं मीडिया अधिकारीसंपर्क अधिकारी

सुरक्षा अधिकारी

प्रचालन अनुभागयोजना अनुभागसंभार तंत्र अनुभाग

 

कमान  स्टाफ

कमान स्टाफ में घटना कमांडर (आईसी) सूचना एवं मीडिया अधिकारी (आईएमओ), सुरक्षा अधिकारी (एसओ) तथा संपर्क अधिकारी (एलओ) षामिल होते हैं। वे आईसी को सीधे रिपोर्ट करते हैं और उनके साथ सहायक हो सकते हैं। कमान स्टाफ के अधीन सहायक संगठन हो सकते हैं अथवा नहीं हो सकते हैं। कमान स्टाफ का मुख्य कार्य आईसी को उसके काम निपटाने में सहायता करना है।

सामान्य  स्टाफ

सामान्य स्टाफ के तीन संघटक हैं जो निम्नानुसार हैंः

प्रचालन अनुभाग (ओएस)

प्रचालन अनुभाग घटना से संबंधित उद्देष्यों को पूरा करने के लिए अपेक्षित कूटनीतिक कार्यों के निर्देषन हेतु उŸारदायी है। आपदा प्रबंधन के लिए षाखा प्रभाग तथा समूह के सक्रिय होने की तुरंत आवष्यकता नहीं हो सकती है। ओएस का विस्तार घटना की भयावहता तथा कार्रवाई प्रबंधन में अपेक्षित विभिन्न प्रकार के कार्यात्मक समूहों की संख्या पर निर्भर करता है।

 

योजना अनुभाग (पीएस)

पीएस घटना की जानकारी के संग्रहण, मूल्यांकन तथा प्रदर्षन, संसाधनों के अनुरक्षण तथा ट्रैकिंग, आपदा कार्रवाई योजना (आईएपी) तथा अन्य आवष्यक आपदा संबंधी प्रलेखीकरण के लिए योजना अनुभाग उŸारदायी है। वे अतिरिक्त संसाधनों की आवष्यकता का आकलन करेंगे, जहां तक इन्हें जुटाया जा सके, इस बात का प्रस्ताव रखेंगे तथा आईसी को जानकारी देते रहेंगे। यह अनुभाग संसाधनों के विघटन (डिमोबिलाइजेषन) की योजना भी तैयार करेगा।

 

संभार तंत्र एवं विŸा अनुभाग (एल एंड एफएस)

संभार तंत्र एवं विŸा अनुभाग आपदा कार्रवाई की सहायता के लिए सुविधाएं, सेवाएं, सामग्री, उपस्कर तथा अन्य संसाधन प्रदान करने के लिए उŸारदायी है। अनुभाग प्रमुख आईएसपी को तेयार तथा लागू करने की प्रक्रिया में भाग लेता है, आईएपी को सक्रिय करता है तथा इस अनुभाग की षाखाओं तथा इकाइयों का पर्यवेक्षण करता है। विŸाीय नियमावली के अनुसार, संसाधनों के तीव्र तथा सुचारु प्रापण तथा आपूर्ति को सुनिष्चित करने के क्रम में, विŸाीय षाखा को एलएस में षामिल कर लिया गया है।