परियोजनाएं

एनडीएमए की आयोजना स्कीम के अधीन क्षमता निर्माण एवं प्रषिक्षण परियोजनाएंः

 

आपदा प्रबंधन हेतु क्षमता निर्माण पर एनडीएमए-इग्नू प्रायोगिक परियोजना 

(परियोजना लागतः 2.34 करोड़ रुपए)

एनडीएमए ने इग्नू के सहयोग से निम्नानुसार 11 खतरा प्रवण राज्यों के निम्नलिखित 54 जिलों में सभी नामोद्दिश्ट केंद्रों में 8 आमने-सामने (फेस-टू-फेस) प्रषिक्षण कार्यक्रमों (एफएफटीपी) को संचालित करके आपदा रोकथाम, तैयारी, प्रषमन, कार्रवाई और पुनर्बहाली के क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं और षहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए आपदा प्रबंधन पर क्षमता निर्माण हेतु एक प्रायोगिक परियोजना क्रियान्वित की हैः

  • आंध्र प्रदेष - अनंतपुर, महबूबनगर, श्रीकाकुलम, नैल्लोर, प्रकाषम।
  • असम - धेमाजी, लखीमपुर, बरपेटा, धुबरी, कछार।
  • बिहार - सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पटना, सुपौल, मधेपुरा।
  • हरियाणा - गुड़गाँव, पानीपत, अंबाला, यमुना नगर, रोहतक।
  • हिमाचल प्रदेष - कुल्लू, किन्नौर, चंबा, कांगड़ा, मनाली।
  • केरल - इडुक्की, वायानड, मल्लापुरम, इर्नाकुलम, पालक्कड़।
  • महाराष्ट्र - नाषिक, रायगढ़, ठाणे, पुणे, सतारा।
  • ओडिषा - गंजम, भद्रक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, बालासौर।
  • त्रिपुरा - उतरी त्रिपुरा, दक्षिणी त्रिपुरा, पूर्वी त्रिपुरा (ढलाई), पष्चिमी त्रिपुरा।
  • उत्तराखण्ड - बागेष्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी।
  • पश्चिम बंगाल - बांकुरा, दक्षिणी दिनाजपुर, मुर्षिदाबाद, बुर्दवान, पूर्वी मेदिनीपुर।

कुल मिलाकर, 16479 लक्षित भागीदारों में से 16200 भागीदारों ने एफएफटीपी में भाग लिया। कुल 16479 में से 6648 (40.34ः) सरकारी अधिकारी/कर्मचारी थे, 7941 (48.19ः) पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि थे और 1890 (11.43ः) षहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि थे। कुल 16, 479 भागीदारों में से 4623 महिला भागीदार थीं। जून, 2013 में रिपोर्ट के पूरा होने पर, इग्नू ने परियोजना की मसौदा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है जो अंतिम मुद्रण के लिए प्रक्रियाधीन है।

 

एमडब्ल्यू-8, मंडी भूकंप परिदृष्यः बहु-राज्यीय अभ्यास और जागरूकता अभियान।

 

(परियोजना लागतः 1.44 करोड़ रुपए)

एनडीएमए ने आईआईटी, मुंबई और आईआईटी मद्रास के सहयोग से एक परियोजना षुरू की है जिसका षीर्शक एमडब्ल्यू-8 मंडी, भूकंप परिदृष्य बहु-राज्यीय अभ्यास और जागरूकता अभियान है ताकि हिमालय क्षेत्र में एक बड़े भूकंप के परिणाम की वैज्ञानिक समझ को उपलब्ध कराया जा सके। इस परियोजना का लक्ष्य हरियाणा, हिमाचल प्रदेष, पंजाब के राज्यों और चंडीगढ़ संघराज्य क्षेत्र में जागरूकता सृजन, हितधारकों का सुग्राहीकरण, आईवीएस प्रषिक्षण, क्षमता निर्माण करना था। 13 फरवरी, 2013 को मोहाली, पंचकूला, चंडीगढ़ के तीन षहरों और षिमला में एक वृहत कृत्रिम कवायद/अभ्यास आयोजित किया गया। यह परियोजना पूरी हो गई है और अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।

 

जयप्रकाष नारायण एपेक्स ट्राॅमा केंद्र (जेपीएनएटीसी) में उन्नत ट्राॅमा जीवन सहायता परियोजना पर प्रायोगिक परियोजना।

(परियोजना लागतः 1.18 करोड़ रुपए)

 जयप्रकाष नारायण एपेक्स ट्राॅमा केंद्र (जेपीएनएटीसी) के सहयोग से एनडीएमए ने जेपीएनएटीसी में उन्नत ट्राॅमा जीवन सहायता परियोजना हेतु एक प्रायोगिक परियोजना का काम षुरू किया है। इस परियोजना  को प्रारंभ में असम, बिहार और आंध्र प्रदेष जैसे असुरक्षित तथा आपदा-प्रवण राज्यों में कारगर ट्राॅमा देखभाल प्रदान करने तथा आपदा परिस्थितियों की चुनौतियों से निपटने के लिए ट्राॅमा जीवन सहायता हेतु समर्पित एवं सुप्रषिक्षित डाॅक्टरों, नर्सों और अर्द्ध-चिकित्सा स्टाफ तैयार करने हेतु मानव संसाधन विकसित करने के लिए डिजाइन किया गया था। संस्थान ने परियोजना की मसौदा रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसमें यह बताया गया है कि कुल 129 भागीदारों ने उन्नत ट्राॅमा जीवन सहायता पर प्रषिक्षण में भाग लिया और उसे पूरा किया। इसके अलावा 131 भागीदारों ने ग्रामीण ट्राॅमा टीम विकास पाठ्यक्रम में भाग लिया और पाठ्यक्रम पूरा किया। 53 नर्सों ने भी नर्स पाठ्यक्रम के लिए सफलतापूर्वक उन्नत ट्राॅमा देखभाल कोर्स पूरा किया।

 

लाल बहादुर षास्त्री राश्ट्रीय प्रषासन अकादमी, मसूरी (एलबीएसएनएए) में आपदा प्रबंधन केंद्र में आईएएस/केंद्रीय सेवा के क्षमता निर्माण हेतु प्रायोगिक परियोजना (परियोजना लागतः 0.83 करोड़ रुपए)

एनडीएमए ने लाल बहादुर षास्त्री राश्ट्रीय प्रषासन अकादमी, मसूरी में आपदा प्रबंधन केंद्र, एनआईएआर के सहयोग से एलबीएसएनएए के आईएएस और अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के लिए रिफ्रेषर और ओरिएंटेषन कार्यक्रमों में नियमित अपडेटों के साथ बुनियादी फाउंडेषन प्रषिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने के लिए लाल बहादुर षास्त्री राश्ट्रीय प्रषासन अकादमी, मसूरी में आपदा प्रबंधन केंद्र में आईएएस/केंद्रीय सेवा के क्षमता निर्माण हेतु प्रायोगिक परियोजना का काम षुरू किया। इसका उद्देष्य यह सुनिष्चित करना है कि वे अधिकारी, जिनकी जिला कलक्टरों के पद पर  तैनाती किए जाने की संभावना हैं, आपदा प्रबंधन में न्यूनतम स्तर का प्रषिक्षण प्राप्त करें। वरिश्ठ अधिकारियों के लिए, डीआरआर हेतु नीति विकल्पों के बारे में जागरूकता पर फोकस किया जाएगा। एलबीएसएनएए ने अपनी मसौदा रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसमें बताया गया है कि 1048 भागीदारों ने आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न कोर्सों/माॅड्यूलों में भाग लिया।