round
Alert
round
round

चालू परियोजनाएं

परियोजना 1:- 120 स्थानों के लिए राश्ट्रीय आपदा प्रबंधन सेवा (एन.डी.एम.एस.) प्रायोगिक परियोजना 

एन.डी.एम.ए. भू-भागीय संचार नेटवर्क आपदाओं के दौरान विफल/खराब होते रहते हैं जैसा कि हाल ही में कुछ समय पूर्व जम्मू एवं कष्मीर तथा उत्तराखंड की आपदाओं के मामले में हुआ था। इस समस्या से निजात पाने के लिए, एक एकीकृत दृश्टिकोण अपनाने का प्रयास किया गया है ताकि षांति-काल तथा किसी आपदा स्थिति के दौरान आपदा के प्रबंधकों को भरोसेमंद दूरसंचार आधार ढांचा उपलब्ध कराया जा सके। गृह मंत्रालय, एनडीएमए, एनडीआरएफ मुख्यालय, स्थानीय प्रषासन को उचित निर्णयों को करने में मदद देने के लिए एकीकृत दृश्टिकोण को अपनाना आई.सी.टी. सेवाओं का हिस्सा है। इस परियोजना के लिए, ‘राश्ट्रीय आपदा प्रबंधन सेवा (एन.डी.एम.एस.)’ षीर्शक वाली एक प्रायोगिक परियोजना की नीचे दी गई सूची के अनुसार 120 स्थानों के लिए परिकल्पना की गई हैः 

  • गृह मंत्रालय -01
  • एनडीएमए -01
  • एनडीआरएफ मुख्यालय -01
  •  सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र मुख्यालय -36
  •  चुनिन्दा जिले-81

 

जो भू-भागीय नेटवर्क और एच.एफ. रेडियो से समर्थित एक विष्वसनीय वी-सेट संचार प्रणाली प्रदान करने का कार्य पर आधारित है।

यह परियोजना भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल.) द्वारा लागू की जा रही है।

प्रायोगिक परियोजना के दायरे में गृह मंत्रालय, एनडीएमए, एनडीआरएफ मुख्यालय, राज्य एवं चुनिन्दा संवेदनषील जिलों में आपातकालीन प्रचालन केंद्र हेतु विष्वसनीय दूरसंचार आधार-ढांचा तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना षामिल है।

 

परियोजना के मुख्य लक्ष्य निम्नानुसार हैः

  • आपदा के दौरान प्राथमिकता पर आपदा प्रभावित जिलों के आपातकालीन प्रचालन केंद्रों, राज्यों, एनडीएमए, एनडीआरएफ मुख्यालय, गृह मंत्रालय के बीच वाइस काॅलों को उपलब्ध कराना तथा षांति-काल में अन्य आपात कालीन केंद्रों को बैंडविथ की उपलब्धता पर निर्भर करते हुए एक सीमित तरीके से वाइस काॅल उपलब्ध कराना। 
  • आपदा स्थल से निषुल्क इंटरनेट, ई-मेल, लैंडलाइन (बाहरी काल) तथा मोबाइल (बाहरी काल), वेब सेवाएं तथा अन्य स्थानों को बैंडविथ की उपलब्धता पर निर्भर करते हुए एक सीमित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।
  • वैष्विक गेटवे के माध्यम से ई.पी.ए.बी.एक्स. मषीन उपलब्ध कराई जाएगी जिसमें टेलीफोन कालों को एच.एफ., सेटलाइट, भू-भागीय नेटवर्क या इंटकाम तथा आई.वी.आर.एस. समेत अन्य किसी माध्यम पर भी  ट्रांसफर करने की सुविधा होगी।
  • एच.एफ. रेडियो संपर्क व्यवस्था।
  • विभिन्न पूर्वानुमान तथा चेतावनी एजेंसियों (केंद्रीय जल आयोग, भारतीय विज्ञान मौसम विभाग, आई.एन.सी.ओ.आई.एस, जी.एस.आई आदि) की उनके पोर्टल द्वारा दी जाने वाली जानकारी/सेवाएं प्राप्त करना।
  • आपदा प्रभावित स्थल से विभिन्न सूचनाओं (आॅडियो, वीडियो तथा डेटा) को एकत्रित करके सभी हितधारकों को, जहां तक संभव हो, आपदा के एकल दृष्य को उपलब्ध कराना।
  • गृह मंत्रालय, एनडीएमए, एनडीआरएफ मुख्यालय, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/चुनिन्दा जिलों के साथ रणनीति बनाने तथा सूचना आदान प्रदान के लिए मंच उपलब्ध कराना।

 

प्रस्तावित समाधान 

 राश्ट्रीय भूकंप जोखिम प्रषमन परियोजना (तैयारी चरण)

1. राश्ट्रीय भूकंप जोखिम प्रषमन (तैयारी चरण) परियोजना को 2 वर्शों (2013-15) की अवधि के अंदर कार्यान्वित होने के लिए 24.87 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ एक केंद्रीय प्रायोजित योजना स्कीम के रूप में अनुमोदित कर दिया गया है।

2. राश्ट्रीय भूकंप जोखिम प्रषमन (तैयारी चरण) परियोजना के 2 मुख्य संघटक और उनकी लागत निम्नानुसार हैंः

 

  • प्रौद्योगिकीय-विधिक प्रणाली जिसमें संबंधित षहरों/राज्यों में प्रौद्योगिकी-विधिक प्रणाली को अपनाना, प्रवर्तन, अद्यतन करना-8.20 करोड़ रुपए
  • सांस्थानिक सुदृढ़ीकरण जिसमें काॅलेजों तथा संस्थानों में षिक्षा तथा अनुसंधान का क्षमता निर्माण षामिल है-9.52 करोड़ रुपए
  • भूकंपरोधी निर्माण तकनीकों में कार्यरत षिल्पियों, इंजीनियरों तथा राजमिóियों का क्षमता निर्माण-3.85 करोड़ रुपए
  • राश्ट्रीय स्तर तथा सभी संवेदनषील राज्यों के स्तर पर जन-जागरुकता एवं सुग्राहीकरण कार्यक्रम-1.88 करोड़ रुपए
  • परियोजना प्रबंधन-1.42 करोड़ रुपए

 

 

3. इस परियोजना को एनडीएमए द्वारा राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र जो देष में भूकंपीय क्षेत्र पअ तथा अ  में पड़ते हैं, के समन्वय से क्रियान्वित किया जाना है। तैयारी चरण के अधीन कवर किए जाने वाले षहरों/जिलों की राज्यवार सूची निम्नानुसार हैंः-

Øe la[;k

jkT;@la?k jkT; {ks=

ftyk

‘kgj

Hkwdaih; {ks=

jkT;

1.

vaMeku

mŸkjh rFkk e/; vaMeku

iksVZ Cys;j

5

gk¡

2.

v#.kkpy izns’k

ikiqeikjs

bZVkuxj

5

gk¡

3.

vle

dke:i egkuxj

xqokgkVh

5

gk¡

4.

fcgkj

iVuk

iVuk

4

gk¡

5.

paMhx<+

paMhx<+

paMhx<+

4

gk¡

6.

fnYyh

,u-lh-Vh- fnYyh

fnYyh

4

gk¡

7.

xqtjkr

jktdksV

jktdksV

4

 

8.

gfj;k.kk

Qjhnkckn

Qjhnkckn

4

 

9.

gfj;k.kk

xqM+xkao

xqM+xkao

4

 

10.

tEew ,oa d’ehj

Jhuxj

Jhuxj

5

gk¡

11.

tEew ,oa d’ehj

tEew

tEew

4

 

12.

fgekpy izns’k

f’keyk

f’keyk

4

gk¡

13.

egkjk”Vª

iq.ks

iqq.ks

4

 

14.

es|ky;

iwohZ [kklh igkfM+;ka

f’kykWUx

5

gk¡

15.

fetksje

vkbtkWy

vkbtkWy

5

gk¡

16.

uxkyS.M

dksfgek

dksfgek

5

gk¡

17.

ef.kiqj

iwohZ ,oa if’peh bEQky

bEQky

5

gk¡

18.

iatkc

yqf/k;kuk

yqf/k;kuk

4

 

19.

flfDde

iwohZ flfDde

xaxVksd

4

gk¡

20.

f=iqjk

if’peh f=iqjk

vxjryk

5

gk¡

21.

mŸkj izns’k

xkft;kckn

xkft;kckn

4

 

22.

mŸkj izns’k

xkSre cq) uxj

uks,Mk

4

 

23.

mŸkj izns’k

xksj[kiqj

xksj[kiqj

4

 

24.

mŸkjk[kaM

nsgjknwu

nsgjknwj

4

gk¡

25.

if’pe caxky

dksydkrk

dksydkrk

3

gk¡

 

;ksx

 

 

 

 

टिप्पणी: 25 लक्षित षहरों में से 16 षहर राज्यों की राजधानी हैं। परियोजना के अंतर्गत कवर की जाने वाली कुल जनसंख्या  70189371 है।

 

4. राश्ट्रीय भूकंप जोखिम प्रषमन परियोजना के तैयारी चरण के 4 प्रमुख परिणाम निम्नानुसार हैंः-

  1. माॅडल भवन-निर्माण उप-नियम तथा भूकंपरोधी निर्माण तथा आयोजना मानकों को अपनाने की आवष्यकता पर प्रमुख
    हितधारकों की जागरुकता में बढ़ोतरी।
  2. भूकंपीय जोन  पअ एवं अ में सभी  21 लक्षित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में षहर तथा राज्य स्तरों पर माॅडल भवन-निर्माण
    उपनियमों को अपनाने हेतु अपेक्षित निश्पादन।
  3. जनसाधारण क्षेत्र में एनबीसी 2005 को (जनता के लिए) उपलब्ध कराने हेतु अनुसरण।
  4. भूकंपरोधी निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  5. परियोजनाओं के प्रयासों को जारी रखने के लिए राज्य/षहर स्तर पर क्षमता-निर्माण।
  6. 210 संकाय सदस्यों/अध्यापकों हेतु प्रषिक्षकों का प्रषिक्षण कार्यक्रम।
  7. 450 प्रषिक्षकों का एक सप्ताह की अवधि वाला अनुकूलन कार्यक्रम (ओरिएंटेषन)।
  8.  लक्षित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में 750 सिविल इंजीनियरों, 1050 वास्तुकारों तथा 1500 राजमिस्त्रियों का क्षमता निर्माण।
  9. भागीदार संस्थानों (विषेश रूप से जिला स्तरीय आईटीआई/पाॅलीटेक्निक) की सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण।
  10. लक्षित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में भूकंप जागरुकता अभियानों पर फोकस किया गया।

ख. उपर्युक्त के अलावा, वर्तमान में निम्नलिखित स्कीमें/अध्ययन/कार्यकलाप भी किए जा रहे हैं।

  1. भारत में भवनों के प्रकारों का भूकंपीय असुरक्षिता आकलन  : भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग प्रकारों के भवनों की सूची
    तैयार करने का काम तथा बिल्डिंग की सूचियों में दिखाई देने वाले अलग-अलग प्रकार के भवनों हेतु असुरक्षितता संबंधी कार्यों का विकास कार्य देष के विभिन्न भागों में चार विभिन्न नोडल संस्थानों नामतः ;आईआईटी रूड़की-उŸारी क्षेत्र, ;आईआईटी खड़गपुर-पूर्वी क्षेत्र, ;आईआईटी गुवाहाटी-पूर्वाेŸार क्षेत्र, ; आईआईटी मुंबई-पष्चिमी क्षेत्र तथा आईआईटी, मद्रास-दक्षिणी क्षेत्र के सहयोग से आईआईटी, मुंबई को सौंप दिया गया है। आईआईटी, मंुबई ने अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार कर लिया है।
  2.  उन्नत भूकंप खतरा मानचित्रों की तैयारी : विषेशज्ञों की कार्यकारी समिति (भूभौतिकीय खतरे) की अनुषंसाओं के अनुसार, एनडीएमए ने देष के लिए भूकंप खतरा मानचित्रों को उन्नत करने हेतु भवन-निर्माण सामग्री प्रौद्योगिकी संवर्धन परिशद् (बीएमटीपीसी) के माध्यम से एक परियोजना का काम हाथ में लिया है।
  3. आपदा से बचने के लिए केरल की उच्च भूमि क्षेत्र (हाईलैण्ड्स) तथा पादगिरि (फुटहिल्स) में साॅइल पाइपिंग पर अनुसंधान संबंधी परियोजना : साॅइल पाइपिंग केरल राज्य में हाल ही में देखी गई अद्भुत घटना (फिनोमिना) है। यह आन्तरिक परत एक (सब-सर्फेस) के कटाव की साॅइल इरोषन प्रक्रिया है जो कि एक खतरनाक आपदा है, क्योंकि साॅइल इरोषन मिट्टी के नीचे होता है। यह फिनोमिना नया है तथा इसके लिए अध्ययन हेतु उचित लिखित/दस्तावेज (इंस्ट्रूमेंटेषन) तथा इसके प्रषमन हेतु उपायों को सुझाने की जरूरत है। पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र (सीईएसएस)के माध्यम से केरल सरकार एनडीएमए की विŸाीय सहायता से इस फिनोमिना के अध्ययन तथा इस आपदा के बचने के उपाय सुझाने हेतु साॅइल पाइपिंग परियोजना का काम कर रही है।
  4. केरल में मीनाचिल और मणिमाला में आकस्मिक बाढ़ हेतु पूर्व-चेतावनी प्रणाली : आपदा प्रबंधन विभाग, केरल सरकार के लिए केरल में मीनाचिल तथा मणिमाला नदी घाटियों में आकस्मिक बाढ़ की माॅनीटरिंग के लिए नदी माॅनीटरिंग, माॅडलिंग तथा पूर्व-चेतावनी प्रणाली के विकास हेतु एनडीएमए भू-जनांकिक अनुप्रयोग मिषन (एमजीए), विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव को विŸापोशित कर रहा है।
  5. भारत में भूस्खलन प्रषमन तथा प्रबंधन हेतु तकनीकी परामर्षदाता समिति (टीएसी) का एनडीएमए की को एनडीएमए की पहल पर तथा भूस्खलन तथा हिमस्खलन प्रबंधन पर एनडीएमए के दिषानिर्देष (2009) की सिफारिषों के अनुसार खान मंत्रालय द्वारा गठित किया गया।
  6. बाढ़ से सुरक्षा (फ्लड प्रोटेक्षन) हेतु, एनडीएमए जल संसाधन मंत्रालय/केंद्रीय जल आयोग तथा भारत के सर्वेक्षण विभाग के साथ नदी गहराई मापन सर्वेक्षण तथा भारत के सर्वेक्षण विभाग द्वारा डिजिटल एलिवेषन माॅड्यूल (डीईएम) को तैयार करने (1.10 के वाले स्केल पर 0.5/1.0 सीएल के साथ डीईएम) के लिए परियोजना के संचालन तथा अनुमोदन हेतु समन्वय कर रहा है, जिसका विŸापोशण जल संसाधन मंत्रालय की निधियों द्वारा किया जाएगा।