अन्य कार्यकलाप

पूर्ण स्कीमें/अध्ययन 

 1. ब्रह्मपुत्र नदी कटाव अध्ययन 

“ब्रह्मपुत्र नदी कटाव तथा नियंत्रण” पर एक अध्ययन का काम एनडीएमए द्वारा आईआईटी, रूड़की को दिया गया। इस अध्ययन के परिक्षेत्र में निम्नलिखित षामिल हैंः

ब्रह्मपुत्र  नदी तथा इसकी सहायक बड़ी नदियों (ट्रिब्यूट्रीज) के किनारे के कटाव का उपग्रह आंकड़ा आधारित आकलन।

हाइड्रोलोजिकल डेटा प्रक्रियान्वयन तथा विष्लेशण।

ब्रह्मपुत्र नदी की उप-घाटी (सब बेसिन) में बहाव (रनआॅफ) तथा तलछट (सेडिमेंट) माॅडलिंग तथा इसकी सिफारिषों के बारे में आईआईटी रूड़की ने रिपोर्ट सौंप दी है। इस अध्ययन में ब्रह्मपुत्र नदी के असुरक्षित कटाव वाले भागों के पहचान की गई है। यह अध्ययन रिपोर्ट जल संसाधन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, ब्रह्मपुत्र बोर्ड तथा असम सरकार के पास भेजी गई है। विस्तृत रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें।

 

2. भारत का संभाव्यवादी भूकंपीय खतरा मानचित्र (पीएसएचए) की तैयारी

एनडीएम ने भूकंपीय खतरा विष्लेशण के लिए भूकंपों के एक राश्ट्रीय डेटाबेस कैटालाॅग को बनाने के लिए भारत ने संभाव्यवादी भूकंपीय खतरा मानचित्र (पीएसएचए) के विकास पर एक अध्ययन कार्य किया है जिसमें देष के छह या सात अलग-अलग भूकंप की संभावना वाले क्षेत्रों के लिए तीव्र गति क्षीणन संबंध (स्ट्राॅन्ग मोषन अटेनुएषन रिलेषनषिप्स) का विकास/चयन, तथा विभिन्न वापसी की अवधियों (रिटर्न पीरियडों) के लिए 0.20× 0.200 के ग्रिड पर तलषिला स्तर (बेडराॅक लेवल) पर स्पैक्ट्रम त्वरण (एसए) और उच्चतम धरती त्वरण (पीजीए) के लिए राश्ट्रीय पीएसएचए मानचित्र का विकास षामिल है। भू-तकनीकी जांच के साथ-साथ इस अध्ययन का काम मौजूदा डेटाबेस में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए किया गया है। संरचनात्मक इंजीनियरी अनुसंधान केंद्र, चेन्नई (एसईआरसी) जिसने इस अध्ययन को किया, ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। विस्तृत रिपोर्ट के लिए लिंक/आइकन पर क्लिक करें।

 

3. भारतीय भू-भाग के भूकंपीय माइक्रोजोनेषन हेतु भू-तकनीकी जांच

दिनांक 16.7.2008 को आयोजित भारतीय भू-भाग के भूकंपीय माइक्रोजोनेषन पर राश्ट्रीय कार्यषाला में लिए गए निर्णय के अनुसार, भू-तकनीकी जांच हेतु विषेशज्ञों के कार्यकारी समूह का अतिरिक्त भू-तकनीकी विषेशज्ञों को षामिल करके विस्तार किया गया ताकि भारत में भूकंपीय माइक्रोजोनेषन अध्ययन हेतु भू-तकनीकी जांच के दस्तावेज तैयार किए जा सकें, चूंकि ऊपर उल्लिखित काम को करने के लिए अपेक्षित विषेशज्ञता तथा सुविधाएँ भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू के पास उपलब्ध थी। इसलिए भारतीय भूखंड के भूकंपीय माइक्रोजोनेषन हेतु भू-तकनीकी जांच के लिए तकनीकी दस्तावेज तैयार करना उन्हें सौंपा गया।

इस परियोजना के परिक्षेत्र में भूकंपीय माइक्रोजोनेषन हेतु भू-तकनीकी/भू-भौतिकीय जांच के बारे में सभी संगत ब्यौरा देने वाला एक तकनीकी दस्तावेज को तैयार करना षामिल है। इस तकनीकी दस्तावेज में किसी दिए गए स्थल पर डिजाइन, पुनःमरम्मत (रेट्रोफिटिंग) तथा निर्माण कार्य के लिए संरचनात्मक इंजीनियरों द्वारा आवष्यक भू-तकनीकी जानकारियों उपलब्ध होंगी जिसकी द्रवण क्षमता हो सकती है। इस तकनीकी दस्तावेज का उद्देष्य देष में भूकंपीय माइक्रोजोनेषन कार्य के लिए भू-तकनीकी पहलुओं हेतु एक संदर्भ दस्तावेज के रूप में कार्य करना है। आवष्यक परीक्षणों की संख्या सहित अपेक्षित भू-तकनीकी तथा भू-भौतिकीय जांच, परीक्षणों के विवरण जिसमें इस परीक्षणों को करते समय ली जाने वाली सावधानियों तथा इनकी विधि षामिल है, का तकनीकी दस्तावेज के विभिन्न अध्यायों में वर्णन किया गया है। अंत में भूकंपीय माइक्रोजोनेषन अध्ययन हेतु उचित भू-तकनीकी तथा भू-भौतिकीय जांच करने हेतु दिषानिर्देष इसके अंतिम अध्याय में दिए गए हैं। विस्तृत रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें।

2. बाढ़ से सुरक्षा के लिए, एनडीएमए को डुंबुर एचई परियोजना के डुंबुर बांध की असुरक्षितता अध्ययन हेतु संबद्ध किया गया। केंद्रीय जल आयोग, सीएसआरएमएस तथा एनडीएमए से लिए गए विषेशज्ञों से बनी संयुक्त टीम ने डुंबुर बांध का निरीक्षण किया और सिफारिष के अनुपालन हेतु त्रिपुरा सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की।

3. भारतीय मानक ब्यूरो से प्राप्त संदर्भ

प्रषमन प्रभाग को भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली से विभिन्न संदर्भ (हवाले) प्राप्त हो रहे हैं। ये संदर्भ नए कोडों को बनाने तथा संषोधनों के माध्यम से विभिन्न कोडों के उन्नयन से संबंधित है। एनडीएमए द्वारा देखे जा रहे विशय-मामलों को ध्यान में रखकर ऐसे हवालों पर एनडीएमए अपने विचार देता है जैसे आपदा संबंधी कोड।