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जैविक आपदाएं जैव मूल की प्रक्रिया अथवा घटना के कारण घटित होती हैं अथवा जैविक सदिश (बिओलॉजिकल वेक्टर्स) की वजह से होती हैं जिसमें रोगजनक सूक्ष्मजीव, जीव विष (टॉक्सिन्स) तथा जैव सक्रिय (बायो एक्टिव) पदार्थ शामिल हैं जिनके कारण जान की हानि, चोट, बीमारी अथवा स्वास्थ्य पर अन्य असर, सम्पति को नुकसान, आजीविका तथा सेवाओं को हानि, सामाजिक तथा आर्थिक विघटन अथवा पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। जैविक आपदाओं के उदाहरणों में महामारी का फैलना, जंतुओं एवं जानवर के संक्रामक रोग, कीड़े अथवा अन्य जानवरों से फैला प्लेग अथवा जंतुबाधा (इनफैस्टेशन) शामिल हैं। जैविक आपदाएं निम्न रूप में हो सकती हैं :-

संक्रामक महामारी में किसी आबादी, समुदाय अथवा क्षेत्र में एक समय पर एक साथ विषम रूप में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। उदाहरण के लिए हैजा, प्लेग, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई)/एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस); अथवा,

विश्वव्यापी महामारी एक ऐसी बीमारी है जो एक बहुत बड़े क्षेत्र जैसे कि किसी महाद्वीप अथवा पूरे संसार में फैलती हो, जो वर्तमान में फैली हुई बीमारी, फैल सकने वाली बीमारी अथवा पुनः उभरकर आने वाली बीमारी तथा महामारी हो। उदाहरण के लिए एच1एन1 इनफ्लुएंजा (स्वाइन फ्लू)।