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असुरक्षितता रूपरेखा

भारत अनेक आपदाओं से अलग-अलग प्रकार से असुरक्षित है। भारत के भू-भाग के 58.6% से अधिक हिस्से में सामान्य से लेकर बहुत अधिक तीव्रता वाले भूकंप आते रहते हैं: 4 करोड़ हेक्टेयर (12%) से अधिक भूमि बाढ़ तथा नदी-कटाव के प्रति प्रवण है; 7,516 किलोमीटर लंबे समुद्र तट में से 5,700 किलोमीटर हिस्से में चक्रवात तथा सुनामी की आषंका बनी रहती है। इसके फसल योग्य क्षेत्र का 68% हिस्सा सूखे से असुरक्षित है; तथा इसके पहाड़ी क्षेत्र भूस्खलन तथा हिमस्खलन के जोखिम में रहते हैं। इसके अलावा भारत रासायनिक, जैविक, विकिरणकीय तथा नाभिकीय (सीबीआरएन) आपातस्थितियों तथा अन्य मानव-जनित आपदाओं से भी असुरक्षित है।

भारत में आपदाओं से होने वाले जोखिम परिवर्तषील जनांकिक (डेमोग्राफिक्स) तथा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, अनियोजित षहरीकरण, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विकास, पर्यावरणिक निम्नीकरण, जलवायु-परिवर्तन, वैज्ञानिक खतरे, संक्रामक महामारी तथा देषव्यापी बीमारी से संबंधित बढ़ती असुरक्षितताओं से और बढ़ गए हैं। स्पश्टतः ये सभी बातें एक ऐसी स्थिति में देष को पहुंचाती है जहां आपदाएं गंभीर रूप से भारत की अर्थव्यवस्था, इसकी आबादी तथा धारणीय (सस्टेनेबल) विकास (डिवेलपमेंट) को चुनौती देती हैं।

7,516 किलोमीटर लंबे समुद्र तट में से 5,700 किलोमीटर हिस्से में चक्रवात तथा सुनामी की आषंका रहती है।

 

भारत के भू-भाग के 58.6% से अधिक हिस्से में सामान्य से लेकर बहुत अधिक तीव्रता वाले भूकंप आते रहते हैं।

4 करोड़ हेक्टेयर (भारत के भू-भाग का 12% हिस्सा) बाढ़ तथा नदी-कटाव के प्रति प्रवण है।