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रासायनिक आपदा

रसायन जो कि आधुनिक औद्योगिक तंत्रों का केंद्रबिंदु है] सरकारी] निजी क्षेत्र बृहत् समुदाय में आपदा प्रबंधन तथा एक बड़ी चुनौती का कारण बन रहे हैं। रासायनिक आपदाएं मनुश्यों पर अपना असर डालने में अभिघातक (ट्रॉमेटिक) हो सकती है तथा इनके कारण कई लोग हताहत हुए हैं और प्रकृति तथा सम्पति को भी हानि हुई है। वे चीजें/व्यक्ति जो रासायनिक आपदा की वजह से उच्च जोखिम पर हैं] उनमें मुख्य रूप से औद्योगिक संयंत्र] इसके कर्मचारी अथवा कामगार] खतरनाक रसायन लाने-ले जाने वाले वाहन] आस-पास की बसावट के निवासी] निकटवर्ती भवन] अधिभोक्ता (ऑक्यूपेंट्स) तथा पास-पड़ोस का समुदाय षामिल है। रासायनिक आपदा कई तरीके से उत्पन्न हो सकती है जैसेः-

  1. प्रक्रिया तथा सुरक्षा प्रणाली की विफलता

    -मानवीय चूक

    -तकनीकी चूक

    -प्रबंधन चूक

  2. प्राकृतिक विपदाओं के कारण पड़ने वाला असर
  3. परिवहन के दौरान हुई दुर्घटना
  4. खतरनाक रसायन अपषिश्ट का प्रक्रियान्वयन/निपटान
  5. आतंकवादी हमला/उपद्रव जिसके कारण तोड़-फोड़ हो जाए

भारत में रासायनिक आपदा जोखिम की प्रास्थिति
भारत में वर्श 1984 में संसार की विकटतम रासायनिक (औद्योगिक) आपदा "भोपाल गैस त्रासदी” घटित हुई थी। भोपाल गैस त्रासदी इतिहास में सर्वाधिक विनाषकारी रासायनिक दुर्घटना थी] जिसमें जहरीली गैस मिथाइल आइसो साइनाइट (एमआईसी) के अचानक हुए रिसाव के कारण 2500 से अधिक लोग मारे गए।
ऐसी दुर्घटनाएं चोंटों] दर्द] नुकसान] जीवन हानि] सम्पति तथा पर्यावरण को क्षति की दृश्टि से उल्लेखनीय है। भारत में भोपाल गैस त्रासदी की दुर्घटना के बाद कई रासायनिक दुर्घटनाएं हुई हैं। जिससे देष की इन दुर्घटनाओं से असुरक्षितता के बारे में पता चलता है। केवल पिछले दषक में ही] भारत में 130 उल्लेखनीय रासायनिक दुर्घटनाएं हुई हैं] जिनमें 259 मौतें तथा बड़ी संख्या में 563 लोग घायल हुए।
भारत के सभी क्षेत्रों में] 301 जिलों तथा 25 राज्यों एवं 3 संघ राज्य क्षेत्रों में 1861 बृहत् दुर्घटनाएं संकट इकाइयां (एमएएच) हैं। इनके अलावा] हजारों की संख्या में पंजीकृत तथा खतरनाक रासायनिक कारखाना (एमएएच मापदंड के नीचे के स्तर वाले) तथा असंगठित क्षेत्र हैं जो खतरनाक रासायनिक सामग्री की अनेक किस्म के रसायन इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे गंभीर तथा जटिल स्तर वाले आपदा जोखिम का खतरा है।

रासायनिक जोखिम को दूर करने के लिए भारत में किए गए सुरक्षोपाय
भारत में व्यापक कानूनी/सांस्थानिक रूपरेखा विद्यमान है। परिवहन में सुरक्षा] देनदारी] बीमा तथा क्षति-पूर्ति को कवर करने वाले कई विनियम का अधिनियमन किया जा चुका है।
रासायनिक आपदा प्रबंधन पर देष में लागू संगत प्रावधान निम्नलिखित हैं :-

  1. विस्फोटक अधिनियम 1884 - पेट्रोलियम अधिनियम 1934
  2. कारखाना अधिनियम 1948 - कीटनाषक अधिनियम 1968
  3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 - मोटर वाहन अधिनियम 1988
  4. सार्वजनिक देनदारी बीमा अधिनियम 1991 - आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005

भारत सरकार ने इसके अलावा नए कानून जैसे एमएसआईएचसी नियमावली] ईपीपीआर नियमावली] एसएमपीवी नियमावली] सीएमवी नियमावली] गैस सिलिंडर नियमावली] खतरनाक रासायनिक अपषिश्ट नियमावली] गोदी कामगार नियमावली तथा उनके संषोधनों के माध्यम से रासायनिक सुरक्षा तथा रासायनिक दुर्घटनाओं के प्रबंधन पर कानूनी रूपरेखा को मजबूत किया गया है।
भारत के राश्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने रासायनिक आपदा प्रबंधन पर अतिविषिश्ट दिषानिर्देष तैयार किए हैं। इन दिषानिर्देषों को मंत्रालयों, विभागों तथा राज्य प्राधिकरणों को अपनी आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार करने के लिए निर्देष देने हेतु तैयार किया गया है। ये दिषानिर्देष रासायनिक आपदा से निपटने की तैयारी तथा कार्रवाई के लिए विभिन्न स्तरों पर एक सक्रिय] भागीदारीपूर्ण] बहु-विशयक तथा बहु-क्षेत्रीय दृश्टिकोण अपनाने की मांग करते हैं। इसके अलावा] एनडीएमए मौजूदा रूपरेखा में प्रस्तावित संषोधन के साथ-साथ] देष में आगामी रासायनिक आपदाओं से निपटने के लिए मंत्री-समूह (जीओआई) को विषेश जानकारी उपलब्ध कराई है। एनडीएमए ने भारत में रासायनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीआईएफ (मुख्य कारखाना निरीक्षणालय) के पुनर्गठन का भी काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओईएफ) तथा एनडीएमए रासायनिक औद्योगिक आपदा प्रबंधन पर राश्ट्रीय कार्य योजना (एनएपी-सीआईडीएम) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में लीन है। जो भारत में रासायनिक आपदा प्रबंधन के लिए रोडमैप के रूप में काम करेगी।